!! किया क्या है दुनिया में आकर !!
शराफ़त कुछ तो रहने दो बाक़ी वो शर्मिंदा न हो इंसा बनाकर इतना तो पानी बचाकर रख लो आँखें मिला सको उससे जाकर है कितनी बड़ी ये भूख तुम्हारी थकोगे तुम भला कितना पाकर इस सृष्टि में स्वामी बस एक ही है कितना भी कमा लो रहोगे चाकर न आँसू पोछे न ही बाँटी हँसी न देखा किसी की धड़कन गाकर कभी सोचा है बैठ तन्हाई में किया क्या है दुनिया में आकर